ऑनलाइन लोन के लिए आवेदन करते समय सबसे पहले यह देखें कि असल लेंडर कौन है। असली प्लेटफॉर्म स्पष्ट रूप से बैंक या नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) का नाम बताते हैं। कुछ ऐप्स मार्केटप्लेस की तरह काम करते हैं, लेकिन लेंडिंग एंटिटी का नाम आसानी से मिलना चाहिए। अगर नाम नहीं दिखता या जानकारी छिपाई गई है, तो तुरंत रुक जाएं।
RBI के पास रजिस्टर्ड NBFC की सार्वजनिक सूची है, उसमें लेंडर का नाम चेक करने में सिर्फ कुछ मिनट लगते हैं। इससे पता चलता है कि संस्था रेगुलेटेड है या नहीं। लेंडर की क्रेडिबिलिटी जांचने के लिए उसका इतिहास, प्रमोटर्स और फाइनेंशियर्स भी देखें। अगर कोई फिजिकल एड्रेस नहीं दिया गया या गूगल मैप्स पर पता खाली प्लॉट पर जाता है, तो यह स्कैम का संकेत है। असली लेंडर हमेशा अपनी विश्वसनीयता साबित करते हैं, जिससे उधारकर्ता को भरोसा होता है।
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31 Mar 20263 min readEnglish / Hindi

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